





बयूरो: भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव होने के बाद से पंजाब के अमृतसर, फ़िरोज़पुर व फाजिल्का से लगते पाकिस्तान से लगते बॉर्डर जिनमें स्थित अटारी-वाघा बॉर्डर, हुसैनीवाला व सादकी बॉर्डर पर रिट्रीट सेरेमनी बंद कर दी गई थी, जो आज से दोबारा शुरू हो गई। लेकिन इस बार पहले की तरह न तो दोनों तरफ के गेट खोले गए और न ही बीएसएफ जवानों और पाक रेंजर्स ने हाथ मिलाए। अटारी बॉर्डर पर भारत की ओर से करीब 1500 सैलानी पहुंचे और वंदे मातरम व भारत माता की जय के नारे लगाए। लेकिन, पाकिस्तानी की गैलरी पूरी तरह से खाली थी। पाकिस्तानी रेंजर्स ने औपचारिकता के तौर पर अपनी तरफ से झंड़ा फहराने की रस्म तो अदा की, मगर उनका हौसला बढ़ाने वाले दर्शक नहीं थे। मंगलवार शाम 6:30 बजे बीएसएफ जवानों और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच रिट्रीट सेरेमनी हुई।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद 7 मई से रिट्रीट सेरेमनी बंद कर दी गई थी। बीएसएफ पंजाब फ्रंटियर की तरफ से एक्स पर पोस्ट की गई थी, जिसमें कहा गया कि हाल ही में पहलगाम में हुए दुखद आतंकी हमले के मद्देनजर फैसला लिया गया है। इसके तहत पंजाब स्थित अटारी, हुसैनीवाला और सदकी बॉर्डर पर होने वाली रिट्रीट सेरेमनी के दौरान प्रतीकात्मक प्रदर्शन को सीमित कर दिया गया है। रिट्रीट सेरेमनी भारत के सीमा सुरक्षा बल और पाकिस्तान रेंजर्स के बीच होती है। यह आमतौर पर शाम को सूरज ढलने के साथ शुरू होती है। इसमें भारतीय और पाकिस्तानी सैनिकों की परेड होती है, जिसमें दोनों देशों के कमांडर हाथ मिलाते हैं। इसका समापन राष्ट्रीय ध्वज को एक साथ नीचे उतारने के साथ किया जाता है। इसे रोजाना हजारों दर्शक देखने के लिए आते हैं।