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अधरंग के लक्षण दिखें तो एक मिनट भी इंतज़ार न करें, हर सेकंड है कीमती” — डॉ. संदीप गोयल

चेहरा टेढ़ा होना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या बोलने में परेशानी हो सकती है अधरंग की चेतावनी; समय पर स्ट्रोक रेडी सेंटर पहुँचना बेहद ज़रूरी।

ब्यूरो: अचानक किसी व्यक्ति का चेहरा टेढ़ा हो जाए, हाथ या पैर में कमजोरी आ जाए या बोलने में परेशानी होने लगे, तो परिवार के लिए यह स्थिति बेहद घबराहट भरी हो सकती है। अक्सर लोग इसे कमजोरी, थकान या बढ़े हुए ब्लड प्रेशर का असर समझकर कुछ देर इंतज़ार करने लगते हैं।

लेकिन यही इंतज़ार मरीज के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

एनएचएस न्यूरोकेयर (एन.एच.एस अस्पताल का एक भाग) के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट एवं डायेरक्टर डॉ. संदीप गोयल (“दिमाग के रोगों के माहिर ) ने आम जनता को जागरूक करते हुए कहा कि स्ट्रोक यानी अधरंग एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है। इसके लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना बेहद ज़रूरी है।

अधरंग में हर मिनट क्यों है महत्वपूर्ण?

डॉ. गोयल के अनुसार, अधरंग तब होता है जब दिमाग के किसी हिस्से में खून की सप्लाई रुक जाती है या दिमाग की कोई रक्त नली फट जाती है। ऐसी स्थिति में दिमाग के सेल्स को नुकसान पहुँच सकता है।

अधरंग के इलाज में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। कुछ मरीजों में समय पर पहुँचने से खून का थक्का घोलने वाली दवाओं से इलाज किया जा सकता है। वहीं, कुछ विशेष मरीजों में आधुनिक तकनीक से दिमाग की रक्त नली में फँसे थक्के को निकाला जा सकता है।

“अधरंग के बाद मरीज कितनी जल्दी सही अस्पताल पहुँचता है, यह उसके इलाज और रिकवरी की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है।” — डॉ. संदीप गोयल

इन लक्षणों को कभी न करें नज़रअंदाज़

डॉ. गोयल ने बताया कि हर व्यक्ति को अधरंग के मुख्य लक्षणों की जानकारी होनी चाहिए।

• चेहरा: अचानक चेहरे का एक तरफ झुक जाना।

• हाथ-पैर: एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन।

• बोलने में परेशानी: ज़ुबान लड़खड़ाना या दूसरे की बात समझने में कठिनाई।

• संतुलन: अचानक चक्कर आना, चलने में परेशानी या संतुलन बिगड़ना।

• आँखें: अचानक एक या दोनों आँखों से दिखाई देने में परेशानी।

• तेज़ सिरदर्द: अचानक असामान्य रूप से बहुत तेज सिरदर्द होना।

इनमें से कोई भी लक्षण अचानक दिखाई दे तो तुरंत इमरजेंसी चिकित्सा सहायता लें।

कुछ मिनट में लक्षण ठीक हो जाएँ, तब भी खतरा हो सकता है

कई बार मरीज का हाथ कुछ मिनट के लिए कमजोर हो जाता है या बोलने में परेशानी होती है, लेकिन थोड़ी देर बाद सब सामान्य लगने लगता है।

डॉ. गोयल के अनुसार, यह टीआईए यानी मिनी स्ट्रोक की चेतावनी हो सकती है। ऐसे लक्षण भविष्य में बड़े स्ट्रोक के खतरे का संकेत भी हो सकते हैं।

इसलिए लक्षण ठीक हो जाने पर भी तुरंत अस्पताल में जाँच करवानी चाहिए।

स्ट्रोक रेडी सेंटर में समय पर इलाज क्यों है ज़रूरी?

डॉ. गोयल ने बताया कि अधरंग के मरीज को ऐसे अस्पताल पहुँचाना महत्वपूर्ण है जहाँ बिना अनावश्यक देरी के जाँच और विशेषज्ञ उपचार की सुविधाएँ उपलब्ध हों।

एनएचएस अस्पताल, जालंधर में स्थापित स्ट्रोक रेडी सेंटर इसी उद्देश्य से काम कर रहा है, जहाँ 24 घंटे न्यूरोलॉजिकल इमरजेंसी सेवाएँ उपलब्ध हैं।

यहाँ इमरजेंसी विभाग में सीटी स्कैन और एमआरआई, विशेष स्ट्रोक आईसीयू, न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोसर्जरी विशेषज्ञों की टीम, आधुनिक डी एस ए एवं न्यूरो इंटरवेंशन सुविधाएँ उपलब्ध हैं।

उपयुक्त मरीजों के लिए थ्रोम्बोलाइसिस और मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टॉमी जैसी आधुनिक उपचार तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।

न्यूरोलॉजी के क्षेत्र में 27 वर्षों से अधिक अनुभव रखने वाले डॉ. संदीप गोयल के नेतृत्व में एनएचएस न्यूरोकेयर का उद्देश्य अधरंग के मरीजों को समय पर विशेषज्ञ देखभाल उपलब्ध कराना है।

अधरंग होने पर परिवार को क्या करना चाहिए?

डॉ. गोयल ने विशेष रूप से अपील की कि अधरंग के लक्षण दिखाई देने पर मरीज को घर पर आराम करने के लिए न छोड़ें।

मालिश, घरेलू नुस्खों या अपने आप दवा देने में समय बर्बाद न करें। मरीज को कुछ खिलाने-पिलाने से भी बचें, क्योंकि निगलने में परेशानी हो सकती है।

तुरंत एम्बुलेंस बुलाएँ और अधरंग के इलाज की सुविधा वाले अस्पताल पहुँचें। लक्षण शुरू होने का समय याद रखें और डॉक्टर को बताएँ।

डॉ. संदीप गोयल की जनता से विशेष अपील

“अक्सर लोग अधरंग के लक्षण पहचान नहीं पाते या यह सोचकर इंतज़ार करते हैं कि कुछ देर में मरीज ठीक हो जाएगा। लेकिन अधरंग में यह देरी बहुत भारी पड़ सकती है। मेरी सभी परिवारों से अपील है कि चेहरे का टेढ़ा होना, हाथ-पैर में अचानक कमजोरी या बोलने में परेशानी को कभी मामूली न समझें। तुरंत इमरजेंसी पहुँचें। आपका समय पर लिया गया फैसला किसी की जान बचाने और गंभीर विकलांगता के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।”

डॉ. संदीप गोयल

(“दिमाग के रोगों के माहिर )

प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट एवं डायेरक्टर एनएचएस न्यूरोकेयर (a unit of NHS Hospital)

जालंधर

अधरंग के लक्षण पहचानें। इंतज़ार न करें। तुरंत इमरजेंसी पहुँचें।

NHS Hospital – Stroke Ready Centre (8196946333)

Because Every Second Shapes Recovery.