ब्यूरो: पंजाब कांग्रेस के प्रदेश सचिव रविंदर सिंह लाडी ने गुलजार सिंह की आत्महत्या के मामले में पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा की भूमिका की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
रविंदर सिंह लाडी ने कहा कि सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसमें कथित तौर पर मृतक गुलजार सिंह अपनी मृत्यु से पहले हरपाल सिंह चीमा पर गंभीर आरोप लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में लगाए गए आरोप बेहद गंभीर हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पंजाब की AAP सरकार में लोकतांत्रिक तरीके से सवाल उठाने वाले लोगों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, वह बेहद चिंताजनक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। सरकार का काम जनता के सवालों का जवाब देना है, न कि सवाल पूछने वालों को डराना, धमकाना या प्रताड़ित करना।
अपने बेटे को नशे का शिकार बनते देखकर चिंतित दलित समुदाय से आने वाले गुलज़ार सिंह ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से केवल इतना सवाल किया था कि सरकार उनके गांव और पंजाब में नशे के कारोबार को रोकने में इतनी बुरी तरह क्यों नाकाम रही है। एक नागरिक द्वारा सरकार से जवाब मांगना उसका संवैधानिक अधिकार है।
लेकिन आरोप है कि इस सवाल को लेकर उन्हें इतना प्रताड़ित और अपमानित किया गया कि उन पर माफी मांगने के लिए दबाव बनाया गया। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर ज़हर खा लिया। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते हुए, उचित इलाज के अभाव में आखिरकार उन्होंने अपनी जिंदगी की जंग हार दी। यह घटना बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
इसी तरह मोहन्जीत सिंह को भी मुख्यमंत्री भगवंत मान के खिलाफ काला झंडा दिखाकर विरोध करने के कारण कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया। लोकतंत्र में मुख्यमंत्री या सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का अधिकार है। अगर विरोध करने वालों के साथ पुलिसिया कार्रवाई या प्रताड़ना की जाती है, तो यह लोकतंत्र और संविधान दोनों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
सरकार का काम जनता को जवाब देना है, सवाल पूछने वालों को कुचलना नहीं। पंजाब की जनता जवाब चाहती है कि आखिर सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है?
गुलज़ार सिंह के परिवार को जल्द से जल्द न्याय मिलना चाहिए। उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच करवाई जानी चाहिए तथा यदि जांच में किसी मंत्री, अधिकारी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार FIR दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
मैं मुख्यमंत्री भगवंत मान से मांग करता हूं कि वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें और इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी प्रभावशाली व्यक्ति को जांच प्रभावित करने का अवसर न मिले।
पंजाब की जनता डरने वाली नहीं है। सवाल पूछना अपराध नहीं है—यह लोकतंत्र का अधिकार है।