









बयूरो : जालंधर में GST विभाग ने बड़े पैमाने पर चल रहे कथित फर्जी बिलिंग नेटवर्क का खुलासा किया है। GST विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक गिरफ्तारी भी की है। जांच में सामने आया है कि फर्जी लेनदेन के जरिए करोड़ों रूपए की टैक्स चोरी की गई है। विभाग को आशंका है कि इस नेटवर्क की कड़ियां कई एक्सपोर्ट कंपनियों तक भी जुड़ी हो सकती हैं, जिनकी भूमिका की अब गहराई से जांच की जा रही है। अधिकारियों अनुसार, रामसंस कॉर्पोरेशन के संचालक भूपिंदर सिंह को हिरासत में लिया गया है। आरोप है कि फर्जी कारोबारी गतिविधियां दिखाकर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) का गलत लाभ लिया गया, जिससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है। बताया जा रहा है कि, रामसंस कॉर्पोरेशन के संचालक भूपिंदर ने फर्जी कारोबार दिखाकर 8.35 करोड़ रुपए की इनपुट टैक्स क्रेडिट चोरी करके सरकार को चूना लगाया है। जांच में करोड़ों रूपए के संदिग्ध बिल और लेनदेन सामने आए हैं। विभाग के अनुसार 1 दिन पहले जिस 55.35 करोड़ रुपए की फर्जी बिलिंग का खुलासा किया है, उस फर्जी बिलों की चेन में एक्सपोर्ट कंपनियां फंस सकती है। फिलहाल इस मामले में गहराई से जांच की जा रही है। इस जांच के दौरान एक्सपोर्ट कंपनियां ब्लैक मनी को व्हाइट करने, टैक्स चोरी करने व एक्सपोर्ट इंसेटिव स्कीमों का लाभ के लेने के लिए फर्जी कारोबार के बिल खरीदने के मामले में शिकंजे में आ सकती है। विभागीय जांच में यह भी पता चला है कि एक ही स्थान से कई फर्मों का संचालन कागजों में दिखाया गया। ट्रांसपोर्ट और सामान की मूवमेंट से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां पाई गई हैं। इस कथित टैक्स चोरी का पता मॉडर्न डेटा एनालिसिस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड मॉनिटरिंग सिस्टम की मदद से लगाया गया। बताया जा रहा है कि 1 कमरे में 8 फर्मे चल रही थी और कागजों में ही ट्रक को दौड़ाया जा रहा था। प्राथमिक जांच अनुसार कबाड़ कारोबार से जुड़े फर्जी खरीद-बिक्री के दस्तावेज तैयार कर टैक्स लाभ लेने का प्रयास किया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में वास्तविक व्यापार किए बिना केवल कागजी लेनदेन दिखाकर आईटीसी का दावा किया जाता है। GST विभाग के पवनजीत सिंह ने कहा कि इस मामले की जांच जारी है और इस नेटवर्क से जुड़ी प्रत्येक फर्म एवं व्यक्ति की भूमिका की जांच की जा रही है। यदि जांच में अन्य कंपनियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विभाग अब फर्जी बिलिंग के पूरे नेटवर्क को खंगाल रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कथित नेटवर्क का लाभ किन-किन कारोबारियों और कंपनियों ने उठाया। जानकारी अनुसार GST विभाग अब ‘बिजनेस इंटेलिजेंस एंड फ्रॉड एनालिटिक्स’ नामक एडवांस AI सॉफ्टवेयर से टैक्स की चोरी को पकड़ रहा है। बिल बनाते समय ट्रक नंबर को यह सॉफ्टवेयर बहुत कम समय में फास्टैग और वाहन पोर्टल के डेटा से मैच कर देता है। क्योंकि फर्जी कारोबार वाले ट्रक टोल प्लाजा को पार नहीं करते हैं, जिस कारण वह पकड़ में आ जाते हैं।