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पंजाब की कानून-व्यवस्था संकट में: नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों की सुरक्षा कौन करेगा? : रविंदर सिंह

बयूरो : कांग्रेसी नेता रविंदर सिंह ने कहा कि मानसा में नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर हत्या पंजाब की कानून-व्यवस्था और नशे की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह केवल 1 व्यक्ति की मृत्यु नहीं, बल्कि नागरिकों की सुरक्षा और सरकार की जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, झोटा का एक मेडिकल स्टोर के मालिक से कथित नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर विवाद हुआ, जिसके दौरान उन्हें गोली मार दी गई। इस घटना में उनके 4 साथियों के घायल होने की भी खबर है। पुलिस ने पुरानी व्यक्तिगत रंजिश का पहलू भी सामने रखा है और मुख्य आरोपी की कथित रूप से मदद करने वाले 1 व्यक्ति की गिरफ्तारी की जानकारी दी है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि सभी परिस्थितियों और संभावित कारणों का पता लगाया जा सके।

लाडी ने झोटा के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी हत्या ने समाज में दुख और आक्रोश पैदा किया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नशे के खिलाफ आवाज़ उठाने वाले लोग ही हिंसा का शिकार हो सकते हैं, तो आम नागरिक अपनी सुरक्षा के लिए किस पर भरोसा करें?

भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार ने पंजाब को नशामुक्त बनाने का वादा किया था। युद्ध नशे के विरुद्ध जैसे अभियानों के माध्यम से लोगों को आश्वासन दिया गया कि नशे के नेटवर्क को तोड़ा जाएगा और युवाओं का भविष्य सुरक्षित किया जाएगा।

लेकिन किसी अभियान की सफलता केवल नारों, होर्डिंगों और प्रेस कॉन्फ्रेंस से नहीं मापी जा सकती। इसका वास्तविक मूल्यांकन नशे की उपलब्धता में कमी, बड़े तस्करों के खिलाफ कार्रवाई, नशे से होने वाली मौतों की रोकथाम और नशे की लत से जूझ रहे लोगों के पुनर्वास के आधार पर होना चाहिए।

अगस्त 2026 में गुरदासपुर जिले के बुद्धा बाला गांव में 25 वर्षीय बचित्तर सिंह की संदिग्ध ड्रग ओवरडोज से मौत की खबर सामने आई थी। इसके बाद क्षेत्र में कथित नशा बिक्री को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों पर आधारित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब में 2024 के दौरान संदिग्ध ड्रग ओवरडोज से 106 मौतें दर्ज हुईं, जबकि 2023 में यह संख्या 89 थी।

ये आंकड़े वर्तमान स्थिति की पूरी तस्वीर नहीं हैं, लेकिन नशे की रोकथाम, उपचार और सरकारी कार्रवाई को मजबूत बनाने की आवश्यकता अवश्य दर्शाते हैं।

सरकार को मेडिकल स्टोरों और अन्य माध्यमों से नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री की जांच करनी चाहिए। दवाओं की बिक्री से संबंधित कानूनों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए। बड़े तस्करी नेटवर्क की पहचान कर उनकी आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना आवश्यक है।

रविंदर लाडी ने कहा कि, मैं मांग करता हूं कि झोटा की हत्या की निष्पक्ष जांच हो, मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया जाए और घटना के बाद कथित रूप से सहायता करने वालों की भूमिका की जांच की जाए। यदि पहले कोई शिकायत या धमकी पुलिस के संज्ञान में लाई गई थी, तो उसकी भी पड़ताल होनी चाहिए। पीड़ित परिवार और घायल गवाहों को आवश्यक सुरक्षा दी जाए।

सरकार को नशे की बरामदगी, मुकदमों, दोषसिद्धि, संदिग्ध ओवरडोज से होने वाली मौतों और पुनर्वास के परिणामों से संबंधित पारदर्शी आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। युद्ध नशे के विरुद्ध अभियान की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए, ताकि इसकी उपलब्धियों और कमियों का निष्पक्ष मूल्यांकन हो सके।

नशे के खिलाफ शिकायत करने वाले नागरिकों को सुरक्षित व्यवस्था मिलनी चाहिए। कानून अपने हाथ में लेने की स्थिति पैदा होने से रोकना और जांच की जिम्मेदारी पुलिस तथा प्रशासन द्वारा निभाना भी उतना ही आवश्यक है।

परविंदर सिंह झोटा की हत्या कुछ दिनों की राजनीतिक बयानबाजी के बाद भुला दी जाने वाली घटना नहीं बननी चाहिए। उनके परिवार को न्याय मिलना चाहिए और पंजाब के लोगों को सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।

मैं पंजाब सरकार से मांग करता हूं कि मानसा हत्याकांड में तत्काल और निष्पक्ष कार्रवाई की जाए, नशीले पदार्थों की अवैध आपूर्ति पर प्रभावी रोक लगाई जाए और रोकथाम, उपचार तथा पुनर्वास के लिए ठोस योजना लागू की जाए।

पंजाब नशे के खिलाफ लड़ाई केवल प्रचार से नहीं जीत सकता। इसके लिए जवाबदेही, प्रभावी पुलिस व्यवस्था, उपचार और ठोस परिणाम जरूरी हैं। सरकार को अपने काम से साबित करना होगा कि प्रत्येक नागरिक का जीवन महत्वपूर्ण है और जनता की सुरक्षा के मुद्दे उठाने वालों को असहाय नहीं छोड़ा जाएगा।