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जालंधर: Sarvodya Hospital Fraud Case : माननीय कोर्ट को SIT रिपोर्ट का इंतज़ार, सुनवाई 9 मई को, पढ़ें व देखें

बयूरो (गोलमाल न्यूज़) : जालंधर के हेल्थ सेक्टर से जुड़े बहुचर्चित Sarvodya Hospital Fraud Case में आरोपियों की पेंडिंग गिरफ्तारी मामले में SIT की रिपोर्ट माननीय अदालत में अभी तक नहीं आई है। कोर्ट ने इसी वजह से पेंडिंग रिपोर्ट का हवाला देते हुए अब मामले की सुनवाई 9 मई तय कर दी है। मालूम हो कि इससे पहले आरोपियों ने केस को ट्रांसफर करने की एप्लीकेशन लगाई थी जिसे मान लिया गया था। हालांकि शिकायतकर्ता द्वारा इस एप्लीकेशन के खिलाफ भी संबंधित अथॉरिटी को शिकायत दी गई थी।

सनद रहे 23.12.2025 को थाना नवी बारादरी पुलिस ने एफआईआर नंबर 233 दर्ज की थी। इसमें सर्वोदया अस्पताल के डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. संजय मित्तल, डॉ. अनवर खान और CA संदीप कुमार सिंह निवासी नोएडा के खिलाफ IPC की धारा 420, 465, 467, 468, 471, 477-A और 120-B लगाई गई थी। यह धाराएं Non-Bailable अपराध की हैं। CA संदीप कुमार सिंह को तो The Institute of Chartered Accountants of India ने भी नियमों अधीन सजा सुना दी है।

सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार नॉन बेलेबल इस केस सहित अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कांड जैसे केस का एक आरोपी डॉक्टर विदेश गया हुआ है। किडनी कांड में तो डॉक्टर ने कोर्ट से विदेश जाने की अनुमति ले ली है पर क्या फ्रॉड केस में संबंधित अदालत या उसके लिए बनाई गई SIT को बताया गया है या नहीं। इस केस में वो Non-Bailable अपराध के आरोपी हैं। इस बारे जानने के लिए जब SIT के मुखी ADCP को सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फ़ोन नहीं उठाया। अब ऐसे में अगर आरोपी द्वारा SIT को बताया गया तो उसका विरोध करते हुए उसे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया और यदि नहीं बताया तो SIT की चल रही जांच सवालों के घेरे में है।

Sarvodya Hospital Fraud Case – मालूम हो पुलिस द्वारा गिरफ्तारी न करने के चलते शिकायतकर्ता डॉ. पंकज त्रिवेदी ने माननीय अदालत में अर्जी दायर की थी। अदालत में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर धारा 75 Cr.P.C./79 BNSS के तहत गिरफ्तारी वारंट जारी करने संबंधी भी अर्जी लगाई जा चुकी है।

सनद रहे पुलिस की कारगुजारी को देखते हुए न्यायालय ने बीएनएसएस की धारा 175 के तहत सुपरवाइजरी अधिकारों का प्रयोग करते हुए एडीसीपी सिटी-2 से यह स्पष्ट करने के निर्देश दिए थे कि आरोपियों की गिरफ्तारी क्यों नहीं की जा रही और यदि गिरफ्तारी आवश्यक नहीं समझी गई तो उसके ठोस कारण बताए जाएं। लेकिन अभी तक मामले की रिपोर्ट माननीय अदालत में लंबित है। जहां एक ओर पुलिस जांच सवालों के घेरे में है वहीं जालंधर शहर में पिछले दिनों देखा गया कि कैसे आरोपी डाक्टर ने सत्ताधारी नेताओं के एक धार्मिक कार्यक्रम से संबंधित स्पांसर किए गए बोर्ड अवैध रूप से लगाए थे। कहीं इस दाल में कुछ काला तो नहीं ?