बयूरो : जालंधर के हेल्थ सेक्टर से जुड़े सबसे बड़े किडनी कांड के हाई-प्रोफाइल मामले STATE OF PUNJAB VS JUNAID AHMED KHAN etc. की आज यानी 7 फरवरी को जालंधर में माननीय जज राम पाल की कोर्ट में सुनवाई होगी।
इस केस से जुड़े कुछ दिलचस्प तथ्य हैं जो हैरान करते हैं जैसे कुछ समय पहले इस केस में एक एप्लीकेशन लगाई गई थी कि अगर इस केस के मुख्य आरोपी डॉ. राजेश अग्रवाल के पास किसी भी कोर्ट से रेगुलर बेल मिलने के कागज़ हैं तो माननीय अदालत में उस आर्डर की कॉपी दिखाई जाए लेकिन वकीलों से मिली जानकारी अनुसार फिलहाल ऐसे कोई कागज़ नहीं दिखाए गए हैं।
वहीं सरकारी वकील द्वारा जब DRME (Directorate of Research and Medical Education) की तरफ से बहुत अहम गवाह सौदागर चंद को अदालत में बुलाने की गुज़ारिश की गई तो किसी वजह से माननीय अदालत ने उसे नामंजूर कर दिया था।
गौरतलब है कि सौदागर चंद शुरू से इस किडनी कांड की एक महत्वपूर्ण कड़ी रहे हैं। DRME की तरफ से हुई किडनी कांड जांच में शामिल डॉक्टरों और अन्य को दोषी पाया गया था और उनके नाम किडनी कांड FIR में दर्ज किए गए थे। जिसके बाद आरोपी डॉक्टरों का लाइसेंस रद्द किया गया था। पुलिस की जांच में सौदागर चंद का ब्यान है और वह पुलिस द्वारा पेश किए चालान में भी दर्ज है।
इन दोनों नुक्तों पर कानूनी विशेषजों का कहना है कि यह इस केस की महत्वपूर्ण कड़ियां हैं। पहले पुलिस ने एक अहम गवाह को गवाहों की सूची में नहीं डाला और फिर पब्लिक प्रोसिक्यूटर की तरफ से उसकी पेशी हेतु एप्लीकेशन में देरी। शायद इसी वजह से सौदागर चंद को कोर्ट में बुलाने की गुज़ारिश के बावजूद मंजूरी नहीं मिली।
जब डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी दफ्तर में इस बारे सम्पर्क किया गया तो नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने जवाब दिया कि किडनी कांड केस में उक्त सौदागर चंद नामक गवाह की पेशी हेतु दोबारा अपील करने के लिए सीनियर्स को लिखा गया है।
इस सब के बीच कई तरह के सवाल खड़े होते हैं जैसे क्या किडनी कांड के मुख्य आरोपी डॉ. राजेश अग्रवाल के पास रेगुलर जमानत है भी या नहीं ? और अगर DRME ने डॉ. राजेश अग्रवाल को दोषी मानते हुए उस समय उनका लाइसेंस रद्द किया था तो कैसे उसी अथॉरिटी ने उनको दोबारा लाइसेंस दे दिया?
मालूम हो कि किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े इस मामले में पिछले दिनों चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-NRI मीनाक्षी गुप्ता ने निजी कारणों का हवाला देते हुए खुद को इस केस से अलग कर लिया था। वह पिछले 1 साल से इस केस की सुनवाई कर रही थीं।
Kidney Racket में जुनैद ब्रोकर था। वो किडनी देने वाले और लगवाने वालों के मध्य दलाली करता था। मालूम हो कि इस किडनी कांड के आरोपियों की सूची में जालंधर के चर्चित सर्वोदया हॉस्पिटल के डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. संजय मित्तल सहित कई और नाम भी शामिल हैं।