Home Education सीटी ग्रुप में पारंपरिक दीपमाला से जगमगाया शाहपुर परिसर

सीटी ग्रुप में पारंपरिक दीपमाला से जगमगाया शाहपुर परिसर

दीवाली और बंदी छोड़ दिवस पर सैकड़ों मिट्टी के दीप जलाकर दिया एकता, सादगी और परंपरा का संदेश

ब्यूरो: दीपावली और बंदी छोड़ दिवस के पावन अवसर पर सीटी ग्रुप के शाहपुर परिसर में सैकड़ों मिट्टी के दीपों से भव्य दीपमाला सजाई गई। इस आयोजन के माध्यम से आधुनिक उत्सवों के बीच पारंपरिक रीति-रिवाजों, सादगी और त्योहारों के वास्तविक महत्व को पुनः जीवंत करने का प्रयास किया गया।

मिट्टी के दीपों से जगमगाते परिसर ने प्रकाश, उल्लास और सकारात्मकता का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत किया। इस पहल ने संदेश दिया कि त्योहारों की वास्तविक सुंदरता केवल भव्य आयोजनों में नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, खुशियां बांटने, रिश्तों को मजबूत बनाने और दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने में निहित है।

पारंपरिक उत्सवों की झलक प्रस्तुत करती इस दीपमाला में घरों, आंगनों और बरामदों को मिट्टी के दीपों से सजाने की पुरानी परंपरा को साकार किया गया। साथ ही, पर्यावरण के प्रति जागरूक रहते हुए अपनी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश भी दिया गया।

इस आयोजन में विद्यार्थियों, शिक्षकों, विभागाध्यक्षों और कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सीटी परिवार के सभी सदस्यों ने मिलकर दीप प्रज्वलित किए और परिसर को सामूहिक उल्लास एवं एकजुटता के प्रकाश से भर दिया।

इस अवसर पर सीटी ग्रुप के वाइस चेयरमैन हरप्रीत सिंह, सह-अध्यक्ष मैडम परमिंदर कौर, सह-उपाध्यक्ष एडवोकेट मनजिंदर कौर तथा सीटी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, शाहपुर परिसर के कैंपस निदेशक डॉ. जयाशीष सेठी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

संस्थान के नेतृत्व ने त्योहारों से जुड़े सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को सहेजने तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि दीपावली का वास्तविक संदेश शोर के स्थान पर प्रकाश, दिखावे के स्थान पर सादगी और व्यक्तिगत उत्सव के स्थान पर सामूहिक खुशियों को प्राथमिकता देना है।

इस वर्ष दीपावली के साथ बंदी छोड़ दिवस का संयोग भी इस आयोजन को विशेष महत्व प्रदान करता है। बंदी छोड़ दिवस छठे सिख गुरु, श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी द्वारा ग्वालियर के किले से 52 राजाओं को मुक्त करवाकर अपने साथ लाने की ऐतिहासिक घटना की स्मृति में मनाया जाता है। यह दिवस स्वतंत्रता, करुणा, साहस और दूसरों के अधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता है।

इस दीपमाला के माध्यम से सीटी ग्रुप ने यह संदेश दिया कि परंपराएं केवल निभाने की रस्में नहीं, बल्कि जीवन में अपनाए जाने वाले मूल्य हैं। सैकड़ों दीपों से जगमगाते परिसर ने यह भाव व्यक्त किया कि सच्चा उत्सव वही है, जो केवल आसपास ही नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में भी खुशियों और उम्मीदों का प्रकाश फैलाए।