










बयूरो (गोलमाल न्यूज़) : डिफेंस काउंसिल पॉलिसी के विरोध में जिला बार एसोसिएशन, जालंधर का आंदोलन लगातार जारी है। शुक्रवार को भी बार एसोसिएशन द्वारा ‘नो वर्क डे’ मनाया गया। सेशन कोर्ट कॉम्प्लेक्स के मुख्य द्वार के बाहर टेंट लगाकर अधिवक्ताओं ने धरना-प्रदर्शन किया और डिफेंस काउंसिल पॉलिसी के विरोध में जोरदार नारेबाजी करते हुए अपना रोष प्रकट किया। धरने की अध्यक्षता जिला बार एसोसिएशन, जालंधर के प्रधान आदित्य जैन एवं सचिव रोहित गंभीर ने की।
उन्होंने कहा कि यह केवल अधिवक्ताओं के रोजगार का विषय नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था का भी प्रश्न है। सरकार से वेतन लेने वाले अधिवक्ताओं से स्वतंत्र और निष्पक्ष न्याय की अपेक्षा करना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल अदालतों का लंबित कार्य कम करना नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रत्येक नागरिक को निष्पक्ष, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण न्याय उपलब्ध कराना होना चाहिए।
जैन एवं गंभीर ने बातचीत के दौरान ने यह भी स्पष्ट किया कि जिला बार एसोसिएशन का विरोध निःशुल्क विधिक सहायता (लीगल एड) प्रदान करने के उद्देश्य से नहीं है, बल्कि वर्तमान एल.ए.डी.सी. (डिफेंस काउंसिल) व्यवस्था से है। उन्होंने बताया कि पूर्व से लागू लीगल एड पैनल प्रणाली के अंतर्गत आज भी लगभग 50 से 60 अधिवक्ता पैनल पर कार्यरत हैं। यदि विधिक सहायता से संबंधित समस्त कार्य केवल छह डिफेंस काउंसिलों तक सीमित रखने के बजाय उक्त पैनल के सभी अधिवक्ताओं को समान रूप से आवंटित किया जाए, चाहे उनकी संख्या बढ़ाकर 80 या 100 ही क्यों न करनी पड़े, तो बार को इस व्यवस्था पर कोई आपत्ति नहीं होगी। उनका कहना था कि इससे अधिक से अधिक अधिवक्ताओं को कार्य करने का अवसर मिलेगा तथा विधिक सहायता का उद्देश्य भी प्रभावी ढंग से पूरा होगा।