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जालंधर: Sarvodya हॉस्पिटल मामले में माननीय कोर्ट सख्त, Dr. Kapil Gupta संबंधी याचिका में मांगी लिखित रिपोर्ट, Report की अनुपलब्धता पर SIT और SHO किए जा सकते हैं तलब, पढ़ें व देखें

बयूरो (गोलमाल न्यूज़) : जालंधर के हेल्थ क्षेत्र से जुड़े Sarvodya Hospital मामले में कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अब आरोपी डॉ. कपिल गुप्ता पुत्र मित्तर पाल द्वारा दायर याचिका में शिकंजा कसा है। माननीय कोर्ट ने डॉ. गुप्ता द्वारा पासपोर्ट रीन्यू करवाने के लिए लगाई गई अर्जी पर पूछा है कि क्या वो इस केस की जांच में शामिल हुए थे या नहीं। साथ ही पुलिस से भी सख्त लहजे में जवाब मांगा गया है कि क्या SIT को डॉ. कपिल गुप्ता के पासपोर्ट के नवीनीकरण के आवेदन पर कोई आपत्ति है ?वकील अनुसार उक्त सारी जानकारी एकत्रित कर कोर्ट में सबमिट करने की जिम्मेदारी नवी बारादरी के SHO को सौंपी गई है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अगर रिपोर्ट पेश नहीं की गई तो SHO के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जा सकता है।

ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या डॉ. कपिल गुप्ता ने इस केस में जमानत ली है या नहीं, क्योंकि वो भी डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. अनवर इब्राहिम खान और नोएडा के CA संदीप कुमार सिंह सहित Non-Bailable अपराध के आरोपी हैं।

जानकारी के अनुसार, यह केस राजबीर कौर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की माननीय अदालत में सुना गया है। कोर्ट ने कहा कि डॉ. कपिल गुप्ता द्वारा पासपोर्ट रीन्यूल हेतु दायर याचिका में सारे तथ्य अवश्य सामने आने चाहिए। हालाँकि, कोर्ट ने 15 अप्रैल को ही रिपोर्ट मांगी थी कि क्या कपिल गुप्ता जांच में शामिल हुए हैं या नहीं, लेकिन इस संबंध में माननीय अदालत को सुनवाई तक कोई जानकारी मुहैया नहीं करवाई गई है।

माननीय कोर्ट ने आदेश दिया है कि जल्द से जल्द आदेश की कॉपियां SHO को भेजी जाएं ताकि 27 मई को उचित रिपोर्ट अदालत में पेश की जा सके। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सही रिपोर्ट नहीं दी गई तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

मालूम हो कि कपिल गुप्ता ने 27 मई से पहले पासपोर्ट रीन्यूल फाइल पर विचार करने के लिए एक आवेदन दिया था, जिसमें कहा गया था कि थाना नवी बारादरी ने No Objection Report दे दी है और अब कोर्ट भी उन्हें No Objection दे।

हालाँकि, कोर्ट ने भी सवाल उठाया कि जब इस केस में SIT गठित है तो थाने से NOR कैसे जारी हो गई ? किसने जारी की और किस आधार पर दी गई? हालांकि, रीडर ने कोर्ट को बताया कि मुख्य फाइल में पुलिस की NOR लगी हुई है।

दूसरी तरफ डॉ. गुप्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि पुलिस खुद ही डॉ. कपिल गुप्ता को जांच में शामिल नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने अभी तक यह निर्णय नहीं लिया है कि आवेदक को जांच में शामिल किया जाना है या नहीं और वह इस संबंध में Affidavit भी दे सकते हैं। इससे साफ साफ उन्होंने सारा ठीकरा पुलिस पर ही फोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि अभी SIT की रिपोर्ट नहीं आई है, इसलिए उन्होंने कोर्ट से NOR के लिए अनुरोध किया।

कोर्ट ने कहा कि न्यायालय मानती है कि संबंधित अफसर की लिखित रिपोर्ट जरूरी है। यदि SIT गठित है तो आवेदक के जांच में शामिल होने या न होने के संबंध में SIT की रिपोर्ट के बिना NOR जारी करने हेतु वकील के निवेदन पर पूर्णतः विश्वास नहीं किया जा सकता। कोर्ट आगे कहा कि वह कपिल गुप्ता के विदेश यात्रा करने के अधिकार से अवगत है, लेकिन साथ ही किसी लंबित FIR के संबंध में जांच में सहयोग करना यावहिकाकर्ता का कर्तव्य भी है।

कोर्ट ने SHO नवी बारादरी को Special Messenger बनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि कपिल गुप्ता को जांच में शामिल करने की जरूरत नहीं है तो SIT इसे लिखित में दे और यदि उनको जान-बूझकर जांच में शामिल नहीं किया जा रहा है तो यह भी लिखित में बताया जाए। इन बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सुनवाई Prepone करने को उचित नहीं माना। कोर्ट ने SIT से पूछा कि क्या कोई ऐसा सच या तथ्य है जिसे SIT इस आवेदन पर निर्णय लेने के लिए न्यायालय के नोटिस में लाना चाहती हो। SHO नवी बारादरी को इस आदेश की प्रति SIT तक पहुँचाने और रिपोर्ट प्राप्त करने के लिए विशेष दूत (Special Messenger) नियुक्त किया गया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि 27.05.2026 को न्यायालय में रिपोर्ट पेश नहीं हुई तो SHO और गठित SIT को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर रिपोर्ट न आने का कारण बताना होगा। नायब कोर्ट को भी निर्देश दिए गए हैं कि आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए इसे नवी बारादरी थाने तक पहुँचाया जाए। इस केस में FIR 233/23.12.25 नवी बारादरी थाने में दर्ज हुई थी।