‘द नोबेल स्कूल’ में वैसाखी का त्योहार बड़े धूमधाम और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया। इस खास अवसर पर स्कूल परिसर को रंग-बिरंगी सजावट और पारंपरिक पंजाबी रंग में सजाया गया। बच्चों ने मिलकर इस पर्व को सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से जीवंत बना दिया।
इस अवसर पर स्कूल के अध्यक्ष प्रो. सी.एल. कोछड़, मैनेजिंग डायरेक्टर इंजीनियर कुमार शिव कोछड़ , स्कूल के डायरेक्टर सरोज शर्मा , प्रिंसिपल रविंदर कौर जी ने सभी को वैसाखी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बच्चों की विभिन्न प्रस्तुतियों पर उनकी प्रशंसा भी की।
छात्रों ने इस पर्व को और भी खास बनाने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ पंजाबी लोक नृत्य ‘भांगड़ा’ और ‘गिद्धा’ प्रस्तुत किया, जिसने समूचे वातावरण को उल्लास और उमंग से भर दिया। छात्रों ने कविता पाठ और गायन के माध्यम से वैसाखी के महत्व को रेखांकित किया। इसके साथ ही पारंपरिक पंजाबी वेशभूषा में सजे बच्चों ने न केवल आकर्षण का केंद्र बने बल्कि उन्होंने मंच पर आत्मविश्वास से अपनी प्रस्तुति दी।
इस उत्सव ने छात्रों और शिक्षकों के बीच एकता, सामूहिकता और सांस्कृतिक समरसता की भावना को और प्रबल किया। वैसाखी पर्व के माध्यम से ‘द नोबेल स्कूल’ ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं को जीवित रखना भी उसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
इस अवसर पर स्कूल के अध्यक्ष प्रो.सी.एल. कोछड़ जी ने इसके ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वैसाखी न केवल किसानों का पर्व है, बल्कि सिख धर्म के लिए भी विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन 1699 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।