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कोटा कलासिस ने पुलिस प्रशासन संग मिल राहगीरों को वितरित की First Aid Kit

सड़क पर घायल व्यक्ति को प्राथमिक उपचार देने की ट्रेनिंग भी दी

बयूरो: कोटा क्लासिस ने पुलिस प्रशासन व आईकोनिक मीडिया के सहयोग से सड़क पर घायलों को प्राथमिक उपचार देने के लिए अनौखी पहल की है। इसके तहत जालंधर के बीएमसी चौक, गुरुनानक मिशन चौक, नकोदर चौक और मॉडल टाउन सहित आदि सड़कों पर व्यापार करने वालों (स्ट्रीट वेंडर) और वाहन चालकों को प्राथमिक उपचार किट वितरित की।

कोटा क्लासिस के डायरेक्टर योगेश गुप्ता ने कहा कि सड़क पर घायलों के पास स्ट्रीट वेंडर मौजूद होते है, लेकिन उनके पास प्राथमिक उपचार न होने के कारण वह कोई सहयोग नहीं कर पाते। इसीलिए प्राथमिक उपचार किट वितरित की जा रही है। इस मौके पांच सौ सड़क किनारे व्यापार करने वाले (स्ट्रीट वेंडरों) और वाहन चालकों को प्राथमिक उपचार किट वितरित की गई।

कोटा क्लासिस की मैनेजिंग डायरेक्टर पुजा गुप्ता ने कहा कि जब भी कोई नई गाड़ी की खरीद करते है तो साथ में प्राथमिक उपचार किट यानि फर्स्ट एड किट दी जाती है, जो कुछ समय बाद एक्सपायर हो जाती है। इसके बाद ज्यादातर लोग अपनी गाड़ियों में किट रखते नहीं है। जब भी कोई सड़क हादसा होता है, अगर वाहन में या स्ट्रीट वेंडर के पास किट हो तो घायल को प्राथमिक उपचार दिया जा सकता है।

कोटा क्लासिस के स्टाफ ने लोगों को घायल को सांस लेने में तक्लीफ न हो, चोट वाली जगह पर एंटीसेपटिक लगाना और पट्टी करने के प्रति जागरुक किया।

प्रतीक महेंद्रू ने कहा कि सभी सामग्रीयों को साफ, स्वच्छ स्थान पर रखे। हर 6 महीने में दवाईयों और अन्य सामग्री की एक्सपाइरी डेट की जांच करते रहे और आवश्यक्तानुसार बदलते रहें।एक जागरूकता के साथ ही जागरूक समाज का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने लोगों को साथ मिलकर विभिन्न जागरूकता अभियान चलाने के लिए प्रेरित किया।

एसीपी ने इस कार्य की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे समाज सेवा के कार्य करना काफी जरुरी है। अगर घायल को समय पर ही प्राथमिक उपचार मिले तो घायलों के लिए काफी मददगार साबित होगा।

Yogesh kumar gupta ने कहा कि सड़क हादसे में घायल को तुरंत इलाज की जरूरत होती है। कई बार एंबुलेंस आने में देरी हो जाती है। जिससे इलाज में भी देरी हो सकती है। ऐसे में घायल को प्राथमिक इलाज देकर कुछ राहत दी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सड़क किनारे व्यापार करने वाले (स्ट्रीट वेंडर)और वाहन चालक वहां मौजूद रहते हैं। अगर वह थोड़ा सहयोग दे तो घायल की जान को बचाया जा सकता है।