









ब्यूरो: किसी भी सभ्य समाज की पहचान इस बात से होती है कि वह अपने सबसे कमजोर माने जाने वाले वर्ग को कितना सम्मान, समानता और अवसर प्रदान करता है। दृष्टिबाधित अथवा नेत्रहीन व्यक्ति समाज की सहानुभूति नहीं, बल्कि अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए समान अवसर चाहते हैं। उन्हें दया का पात्र नहीं, बल्कि सक्षम और सम्मानित नागरिक के रूप में स्वीकार किए जाने की आवश्यकता है।