अंग्रेजी अख़बार की रिपोर्ट ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए, राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ के आरोपों को मिली नई गंभीरता: रविंदर सिंह लाडी
ब्यूरो : पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव रविंदर सिंह लाडी ने एक अंग्रेजी अख़बार की हालिया खोजी रिपोर्ट में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सामने आए तथ्यों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद गंभीर चेतावनी बताया है।
लाडी ने कहा कि अंग्रेजी अख़बार की रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले लगभग 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव, चुनावी डेटा के केंद्रीकरण और मतदाता सूची से संबंधित तकनीकी प्रणालियों जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं।
लाडी ने कहा कि “यह मामला अब केवल चुनाव आयोग के भीतर मतभेद का नहीं रह गया है। यह देश के प्रत्येक मतदाता के अधिकार और लोकतंत्र की विश्वसनीयता का सवाल बन चुका है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लंबे समय से ‘वोट चोरी’ को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। अंग्रेजी अख़बार की इस रिपोर्ट के बाद राहुल गांधी ने फिर आरोप लगाया कि BJP, RSS और चुनाव आयोग की मिलीभगत से ‘वोट चोरी’ की जा रही है और इसे संविधान पर सीधा हमला बताया।
रविंदर सिंह लाडी ने कहा, “राहुल गांधी जी जिन सवालों को लगातार देश के सामने उठा रहे थे, आज अंग्रेजी अख़बार की यह रिपोर्ट उन्हीं सवालों को और गंभीर बना देती है। जब चुनाव आयोग के दो सदस्य ही महत्वपूर्ण फैसलों, मतदाता सूची और डेटा प्रबंधन को लेकर बार-बार आपत्ति दर्ज कर रहे हों, तो देश यह सवाल पूछने के लिए मजबूर है कि आखिर चुनाव आयोग किसके दबाव में और किसके हित में काम कर रहा है।”
लाडी ने आरोप लगाया कि “चुनाव आयोग और BJP के बीच जिस तरह की नजदीकी को लेकर कांग्रेस लगातार सवाल उठाती रही है, मौजूदा घटनाक्रम ने उन आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। अगर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े हो जाएं, तो चुनाव की पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।”
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को केवल यह कहकर पूरे मामले को खत्म नहीं करना चाहिए कि सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। आयोग को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने जिन 14 आपत्तियों को दर्ज किया, उनमें क्या मुद्दे उठाए गए थे और उन आपत्तियों का समाधान किस तरह किया गया। ECI ने कहा है कि उसके सभी आदेश पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं।
लाडी ने कहा: “वोट किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं है। वोट भारत के नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटाया जाता है, किसी योग्य व्यक्ति का नाम जोड़ने में बाधा आती है या चुनावी डेटा की पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं, तो यह सीधे लोकतंत्र की नींव को प्रभावित करता है।”
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और चुनावी डेटा के केंद्रीकरण से जुड़े सभी सवालों का सार्वजनिक रूप से जवाब दिया जाए।
“लोकतंत्र की हत्या केवल संसद या संविधान को खत्म करके नहीं होती। लोकतंत्र की हत्या तब भी होती है जब जनता के वोट की पवित्रता और उसके अधिकार पर सवाल खड़े होने लगें और संस्थाएं जवाबदेही से बचने लगें। आज देश को जवाब चाहिए—किसके वोट को हटाया गया, क्यों हटाया गया, किसने हटाया और किसकी जिम्मेदारी तय हुई?”